तो आज (5 जून) होगी करोड़ों पौधों की हत्या की साजिश!

एक प्रतिशत भी नहीं बच पाते गर्मी में सार्वजनिक स्थानों पर लगाए पौधे
डा.आशुतोष पंत
हल्द्वानी। आप सभी को मेरा सादर नमस्कार। पांच जून को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस है, इसकी शुभकामनाएं। मुझे अफसोस है कि पांच जून को देशभर में करोड़ों पौधे अकाल मृत्यु को प्राप्त होंगे। आप लोग मेरी सोच को नकारात्मक कह सकते हैं, पर अपनी राय बनाने से पहले मेरी बातों पर विचार कीजिये। इस दिन पूरे देश में करोड़ों पौधे रोपे जाएंगे। क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इनमें से कितने अगले पांच जून तक बच पाएंगे। वैसे तो सार्वजनिक स्थानों पर, पार्कों में, सड़कों के किनारे जितना भी पौधरोपण किया जाता है वह व्यर्थ है। आप सर्वे कर लोजिये, इनमें से पांच प्रतिशत पौधे भी नहीं बच पाते हैं। पांच जून को लगाए गए पौधों में से यदि एक प्रतिशत भी बच जाएं, तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। पांच जून अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस है। दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में आजकल मौसम नमीयुक्त होता है वहां पौधे लगाना ठीक है। पर हमारे देश में इस समय आसमान से आग बरस रही है, राजस्थान के चुरू में पारा 50 के पार पहुंच रहा है कमोबेश पूरे देश में तापमान 44-45 डिग्री से ऊपर है। ऐसे में क्या हमें बिना सोचे समझे पौधरोपण करना चाहिए। सोशल मीडिया के कारण कोई भी मुद्दा आजकल फैशन बन जाता है। ये बहुत सराहनीय है कि लोगों में इसी सोशल मीडिया के कारण पर्यावरण के प्रति जागरूकता आयी है पर हमें कोई भी कार्यक्रम करने से पहले उसपर ठीक से विचार तो करना चाहिये। हमें अपनी देश, काल, परिस्थिति के हिसाब से कार्य करना चाहिए। मैं अपने अनुभव के अनुसार पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि पांच जून को जितने भी पौधे सार्वजनिक स्थानों में लगाये जाते हैं उसके एक प्रतिशत भी नहीं बच पाते हैं। लोग पौधे लगाकर फोटो खिंचवाकर अखबारों में छपने, वाट्सअप, फेसबुक पर डालने की हड़बड़ी में रहते हैं। बाद में किसीको पानी डालने की फुर्सत नहीं रहती है। किसी को याद भी नहीं रहता कि उन्होंने पौधा कहाँ लगाया था। मैं पौधे लगाने का विरोध नहीं कर रहा हूँ। मैं तो स्वंय ही हर साल 15 हजार से अधिक पौधे अपने वेतन से लगाता हूँ। मैं तो चाहता ही हूं कि अधिक से अधिक पेड़ लगें। पर मैं इस बात का विरोधी हूं कि एक भी पौधे का नुकसान हो। पीएफ पौधों में भी जीवन होता है , हमें किसी पौधे की जान लेने का कोई अधिकार नहीं है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मुझसे कुछ संस्थाओं ने पौधों के लिए सम्पर्क किया, मैंने उन्हें जुलाई में पौधे उपलब्ध कराने का वादा किया है। मेरा सिर्फ ये अनुरोध है कि इस समय प्रतीकात्मक रूप से उतने ही पौधे लगाइये जिन्हें आप रोज पानी दे सकते हैं, वरना उन्हें अभी नर्सरी में ही रहने दें, वहां कम से कम वो बचे तो रहेंगे। आप लोग अपने इस कार्यक्रम को केवल एक महीने के लिए स्थगित कर दीजिए। जुलाई में लगाये गए पौधों के जिंदा रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। पर्यावरण दिवस मनाने के और भी तरीके हैं, हम संगोष्ठी रख सकते हैं, प्रदूषण रोकने, पॉलीथिन रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला सकते हैं, जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक कर सकते हैं। जब प्राकृतिक वर्षाजल उपलब्ध हो तब हम सब मिलकर पेड़ लगाएं और बड़ा होने तक उन्हें बचाएं, आइये ऐसा संकल्प लें।

– लेखक डा. आशुतोष पंत आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। वे हर साल हजारोें पौधे निशुल्क बांट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। लेख में ये उनके निजी विचार हैं।

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