जमीन के अनुकूल फसल बोये किसान, अधिक होगा मुनाफा

दिल्ली में कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने पर मंत्रणा
मंडी निदेशक बीएस चलाल से वार्ता
कुमाऊं जनसंदेश डेस्क
हल्द्वानी। दिल्ली में कृषि राज्य मंत्रियों की बैठक में किसानों की आय बढ़ाने को लेकर विभिन्न मुददों पर चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर की अध्यक्षता में हुई बैठक में एक बात सामने निकल कर यह आई कि जो जमीन जिस फसल के अनुकूल है, उसी फसल को उसमें बोया जाए तो अधिक उपज लेकर किसान लाभ कमा सकता है। इसके अलावा जैविक खेती और सिंचाई के साधन के रूप में खेतों में छोटे तालाब बनाने और बरसात के दिनों में छतों से गिरने वाले पानी के संचय के लिए रेन वाटर हारवेस्टिंग विधि अपनाने पर जोर दिया गया। आठ जुलाई को दिल्ली में देश के राज्यों के कृषि मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल सहित कृषि निदेशक, मंडी विपणन बोर्ड निदेशक और कृषि विभाग के सचिव, अपर सचिव आदि अधिकारियों ने सम्मेलन में शिरकत की। हिंदी समाचार पोर्टल कुमाऊं जनसंदेश से बातचीत के दौरान मंडी विपणन बोर्ड निदेशक बीएस चलाल ने बताया कि सम्मेलन में किसानों की आय बढ़ाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर विचार विमर्श किया गया। बताया कि सबसे जरूरी बात यह सामने आई कि आय बढ़ाने के लिए किसानों को हर हाल में मिटटी की जांच करानी ही होगी। क्योंकि हर स्थान और हर खेत की मिटटी की उर्वरा क्षमता अलग-अलग होती है। मिटटी की जांच के बाद ही पता लग सकता है कि उसमें कौन-कौन से पोषक तत्व हैं और उन पोषक तत्वोें के अनुसार कौन सी फसल का बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। आम तौर पर कम ही किसान मिटटी का परीक्षण कराते हैं और एक ही खेत में सभी तरह की फसलें, फसल चक्र के अनुसार लगा देते हैं, मगर इससे न तो पर्याप्त उत्पादन हो पाता है और न ही किसान की लागत निकल पाती है। मंडी निदेशक चलाल ने बताया कि इसके अलावा सम्मेलन में जैविक खेती को बढ़़ावा देेने पर भी बातचीत हुई। बताया कि रासायनिक खादों के इस्तेमाल से तैयार की जा रही फसलें और सब्जियां इंसान को बीमार करने वाली साबित हो रही हैं। इसके इतर जैविक खेती से किसान की लागत कम आने, मिटटी की उर्वरकता बरकरार रहने के साथ ही इस विधि से तैयार फसल व सब्जी पूरी तरह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। जैविक फसल व सब्जी की वर्तमान में बेहद मांग और इनका अच्छा दाम भी किसान को आसानी से मिल जाता है।
बताया कि किसानों के समक्ष खेती के दौरान सिंचाई की समस्या की बात भी सामने आती है। इसके लिए बरसात के पानी को स्टोर करने के लिए रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम अपनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए छत का पानी स्टोर करने के अलावा खेतों में छोटे-छोटे तालाब बनाने का सुझाव भी दिया गया। बताया कि देश के विभिन्न राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग हैं। ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने के लिए मैदानी व पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नीति बनाने पर भी विचार विमर्श किया गया।

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