तकलीफ देते सपने ! कभी दिल घबराए, कभी सोच में डूबे

लेखक चंद्रशेखर जोशी
लेखक चंद्रशेखर जोशी

सपने गर ज्यादा परेशान करें तो इनका इलाज जूता
चंद्रशेखर जोशी
हल्द्वानी। अच्छे दिखे तो पसीना छूटे, बुरे दिखे तो पैर कांपे। कभी दिल घबराए, कभी सोच में डूबे। जीवन की बहार चुराएं सपने। रातों की नीद उड़ाएं सपने। सपने गर ज्यादा परेशान करें तो इनका इलाज जूता।
…ये रीत बहुत पुरानी है। गरीब और परेशान व्यक्ति सपनों से भी खुश नहीं रह सकता। आदमी अपनी हैसियत के अनुसार ही भविष्य की बातें सोचता है। दिमाग ज्यादा चले तो कई बार दिन में सपने देखने लगता है। दिवास्वप्न जब पूरे नहीं हुए तो दिन के सपने देखने वाले बदनाम हो गए। लोगों ने दिवास्वप्न देखना कम कर दिया, लेकिन रात के सपनों पर किसी का जोर नहीं।
…सपने आना स्वाभाविक प्रक्रिया है। उम्र बढ़ने के साथ स्वप्न कम होने लगते हैं। बच्चा जब जन्म लेता है तो वह इस दुनिया के कौतुहल से परेशान हो उठता है। बच्चों को नीद में सपने बहुत आते हैं। 25 से 55 वर्ष की उम्र में समझ परिपक्व होने लगती है और स्वप्न की आवृत्ति घट कर करीब एक तिहाई रह जाती है। सपने देखना बुरा नहीं पर सपनों की व्याख्या कुटिल है। कालांतर में अमीरी-गरीबी बढ़ी तो धनवानों ने गरीबों के सपनों की व्याख्या अपने हिसाब से कर दी। उनको डर था कि कहीं लोग सपने शाकार करने में जुट गए तो सत्ता पर संकट घिर आएगा। धीरे-धीरे यही बातें मान्यता बन गई। कहा गया कि यदि अच्छा सपना देखोगे तो बुरा होगा और बुरा देखोगे तो अच्छे की उम्मीद संभव है। लेकिन बुरा देखकर अच्छा महसूस करना संभव नहीं, इसलिए हर सपना केवल डराता है।
…गरीब को अच्छा भोजन नसीब नहीं होता। यदि सपने में भी मिठाई दिख गई तो समझो जीवन में कुछ बुरा होना है। बीमारी का इलाज करना हमेशा ही कठिन था। यदि कोई प्रियजन बीमार हो और सपने में उसे तंदुरुस्त देख लिया तो लोग उसकी मौत का इंतजार करने लगते हैं। बच्चों को पालने में भारी समस्या रहती है। बच्चे के होश संभालने तक परिजन डरे रहते हैं। रात में यदि बच्चा सपने में हंसता दिखे तो डर सताने लगता है। माना जाता है कि अब बच्चा बीमार होगा। किसान को खेत में अच्छी फसल का सपना आ गया तो वह किसी अनिष्टि की सोच में डूब जाता है। छात्र परीक्षा के बाद सपने में खुशी का जश्न देख ले तो फेल होने का भय सताने लगता है।
…अचेतन मन की इच्छा का अर्थ बताने में जब धनवान सफल हो गए तो सपनों का सौदा होने लगा। दिन में सपने दिखाकर लूट और ठगी शुरू हुई। पहले धर्माचार्यों ने इसे कमाई और मान-सम्मान का जरिया बनाया। दुरूस्वप्नों से बचने के लिए भी कई अनुष्ठान सुझाए गए। बाद में तंत्र-मंत्र व विशेष पूजा के माध्यम से सपनों को खत्म किया जाने लगा। इसके लिए अंगूठियां, ताबीज बने, नग और सुनहरे पत्थर बिके, कईयों का धंधा चल पड़ा। सपनों के सौदागर आसानी से सत्ता सुख भोगते हैं।
…असल में कोई भी चेतन अनुभव के महत्व पर शक नहीं करता, इसलिए अचेतन जीवन के किसी सपने पर पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं। इसके बाद भी सपनों का रहस्य जानने में विद्वान जुटे रहे। स्वप्न की व्याख्या करने की कोशिशें बेबीलोनिया से लेकर सभी प्राचीन सभ्यताओं में हुईं। डा. फ्रायड और बाद में चात्रस युंग ने भी इस मनोविज्ञान को समझाने का प्रयास किया। ग्रंथ और पुस्तकें लिखी गईं। वृहदारण्यक उपनिषद् में भी स्वप्नों का वर्णन किया गया। प्राचीन मिस्र में कई पुजारी स्वप्न व्याख्याकार के रूप में जाने जाते थे। यूसुफ और डैनियल का किसी शक्ति की ओर से भेजे गए सपनों की व्याख्या करने के उल्लेख भी है। बाइबिल में तो सपनों की कई घटनाओं का जिक्र किया गया है। मुस्लिम विद्वानों ने तीन प्रकार के सपने बताए। उन्होंने कहा कि सपने झूठे, सच्चे और रोगकारक होते हैं। अधिकतर संस्कृतियों के इतिहास में सपनों का वर्णन किया गया। लेकिन सपनों की असलियत कोई नहीं बता पाया और हर कोशिश नाकाम रही।
…वैज्ञानिक पुरानी धारणाओं से सहमत नहीं हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि सपने एक जैविक क्रिया है। इसके लिए किसी विश्लेषण या व्याख्या की कोई आवश्यकता नहीं है। सपने में दिखने वाली हर चीज शारीरिक और मानसिक कार्यों की एक स्वचालित उत्तेजना और सहज व्यवहार है। कई प्रकार की घटनाएं और विचार जोड़कर अचेतन में दिमाग एक चेन बना लोता है। सपने मानव, पशु और हर जीवित प्राणी के जीवन का हिस्सा हैं। स्वाभाविक सपनों से न तो कोई खतरा है और न ही यह किसी भविष्य के संकेत होते हैं।
…खतरा सपने दिखाने वालों से होता है। मनोविज्ञानी कहते हैं कि सुखद भविष्य की झूठी उम्मीद पैदा करने से व्यक्ति की स्वाभाविक गति बाधित होती है। ज्यादा उम्मीद पालने वाले मानसिक बीमार हो जाते हैं। दूसरे के दिखाए सपनों में जीने वाले, उम्मीद पूरी न होने पर आत्मघाती हो जाते हैं और जान तक गंवा बैठते हैं।
…पुराने समय में लोग विज्ञान से परिचित नहीं थे। सपनों के खतरों से विपटने की कोई खास युक्ति नहीं सूझी तो लोगों ने एक उपाय ढूंढ लिया। भारत के अधिकतर इलाकों में दुरूस्पप्नों से निपटने के लिए रात को सोते समय सिरहाने पर जूता रख दिया जाता है। झूठे सपने दिखाने का इसे कारगर इलाज माना जाता है। भारत के लोग अब भी विज्ञान, मनोविज्ञान, चिकित्सा विज्ञान पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और सपने देख लिया करते हैं, लेकिन अगर झूठे निकले तो सपने दिखाने वालों की भी यहां खैर नहीं।

– लेखक चंद्रशेखर जोशी वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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