अधिकारी कर्मचारी ही नहीं आम जन की भी नियम तोड़ने में भागीदारी

नियमानुसार वाहनों की नम्बर प्लेट पर कुछ भी लिखा नहीं सकते
हल्द्वानी। अधिकारी कर्मचारी ही नहीं जनप्रतिनिधियों के अलावा आम जन भी नियम तोड़ने में बराबर भागीदार बन रहे हैं। मगर अपनी गलती सुधारने की पहल कोई करता नजर नहीं आ रहा है। नियमानुसार वाहनों की नम्बर प्लेट में वाहन पंजीयन संख्या के अलावा कुछ भी लिखा नहीं जा सकता। इन दिनों सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के निजी वाहनों में सरकार व पदनाम लिखवाने का मामला सुर्खियों में है। मगर नियमों पर गौर करें तो सरकारी अधिकारी कर्मचारी ही नहीं कोई भी अपने वाहन की नम्बर प्लेट पर पंजीयन संख्या के अलावा कुछ भी नहीं लिखा सकता। यहां तक की प्रतीक चिहृन भी नहीं। सड़कों पर अक्सर प्रेस, पुलिस, अधिवक्ता, विभिन्न विभागों के अलावा संगठनोें के नाम व पदनाम लिखे वाहन दौड़ते रहते हैं। इसके अलावा आम आदमी भी नम्बर प्लेट पर कुछ न कुछ लिखवाकर नियमों की धज्जियां उड़ाता साफ दिखाई देता है। मगर अपनी गलती की तरफ किसी का ध्यान नहीं। आम जन के वाहनों में धार्मिक चिहृन, आराध्ध्य का नाम या कोई शेर शायरी लिखी अक्सर दिख ही जाती है। जो कि नियमों के खिलाफ ही है।
सरकार की ओर से पूर्व में जारी एक शासनादेश के अनुसार मोटर अधिनियम 1988 एवं केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के प्राविधानों के अनुसार वाहनों में नम्बर प्लेट पर पंजीयन संख्या के अतिरिक्त कुछ भी अंकित किया जाना दंडनीय अपराध है। एवं किसी गैर सरकारी वाहन में नेमप्लेट लगाए जाने की व्यवस्था वर्तमान में नहीं है।
मगर आम तौर पर अधिकारी कर्मचारियों के वाहनों में पदनाम के साथ ही उत्तराखंड या भारत सरकार लिखवाना आम है। जनप्रतिनिधि भी पीछे नहीं हैं। वहीं आम आदमी व विभिन्न विभागों, संस्थानों, संगठनों, संस्था, प्रतिष्ठानों से जुड़े लोग भी वाहनों की नम्बर प्लेट पर नियम के खिलाफ पद, संस्थान या प्रतिष्ठान का नाम लिखवाकर नियम तोड़ने में अधिकारी कर्मचारियों की बराबरी कर रहे हैं। मगर अपनी गलती सुधारने की पहल कोई करता नजर नहीं आ रहा।

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